Saturday, June 20, 2020

शिव

शिव क्या है।

समस्त ब्रह्मांड, धरती, आकाश, सूर्य, ब्रह्मांड के समस्त तारे, समस्त ग्रह,  समस्त तत्व, समस्त ब्रह्मांड में विद्यमान ऊर्जा, सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा, आत्मा सब कुछ जो सोच है अथवा सोच के परे हैं, शिव है। जो शून्य के परे है वह शिव है। निर्विकार शिव है।

जो साकार है वह भी शिव है जो निराकार है वह भी शिव है। शिव माया, मान अपमान, भय, द्वेष से परे है।
धर्म ग्रंथों में लिखा है कि आकाश स्वयं एक लिंग है, अर्थात यदि ब्रह्मांड का यदि कोई स्वरूप है तो वह लिंग स्वरूप है। विज्ञान भी मानने लगा है कि ब्रह्मांड की आकृति लिंग के समान है। 
अर्थात जो है वह भी शिव है जो नहीं है वह भी शिव है।
विज्ञान भी शिव की व्याख्या/विषय में बात करने लगा है। विज्ञान कहता है सब कुछ डार्क/काला मैटर, डार्क/काली एनर्जी/ऊर्जा से उत्पन्न होता है व एक समय अवधि के उपरांत उसी में विलीन हो जाता है। धर्म ग्रंथ भी शिव और शक्ति को इस समस्त ब्रह्मांड का आधार/स्रोत मानते हैं। हम इस पर गहन अध्ययन करते हैं तो पता चलता है कि जो विज्ञान वर्तमान में सिद्ध कर रहा है, या प्रयास कर रहा है, वह धर्म ग्रंथों में हजारों साल पहले ही लिखा जा चुका है।

ब्लैक होल : 

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